राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय
स्कूल स्तर गायन एवं स्वर वाद्य पाठ्यक्रम अंक विभाजन
MARKING SCHEME OF SCHOOL LEVEL
सत्र – 2024–25
नियमित / स्वाध्यायी
🎵 मध्यमा डिप्लोमा इन परफॉर्मिंग आर्ट (M.D.P.A.)
मार्किंग स्कीम – विद्यालय स्तर
📘 M.D.P.A. – पूर्व वर्ष (Previous Year)
| क्रमांक | विषय | विभाग | पूर्णांक | न्यूनतम अंक |
|---|---|---|---|---|
| 1 | संगीत – सैद्धांतिक परीक्षा | वोकल / वाद्य (अपारंपरिक) | 100 | 33 |
| 2 | राग की प्रस्तुति एवं वायवा | वोकल / वाद्य (अपारंपरिक) | 100 | 33 |
| 🎯 कुल योग | 200 | 66 | ||
📘 M.D.P.A. – अंतिम वर्ष (Final Year)
| क्रमांक | विषय | विभाग | पूर्णांक | न्यूनतम अंक |
|---|---|---|---|---|
| 1 | संगीत – सैद्धांतिक परीक्षा | वोकल / वाद्य (अपारंपरिक) | 100 | 33 |
| 2 | राग की प्रस्तुति एवं वायवा | वोकल / वाद्य (अपारंपरिक) | 100 | 33 |
| 🎯 कुल योग | 200 | 66 | ||
नियमित / स्वाध्यायी – 2024–25
Madhyama Diploma In Performing Art (M.D.P.A.)
प्रथम वर्ष गायन / स्वरवाद
संगीत शास्त्र
समय: 3 घंटे पूर्णांक: 100 उत्तीर्णांक: 33
- प्रथम वर्ष पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति।
- स्वर, चढ़ाव, उतराव, विस्तार, मीड, सूत, हरकत, अलंकार, कण, बोल-आलाप, तान, बोल-तान।
- राग की जाति (औडव, षाडव, संपूर्ण) का वर्णन सहित।
- स्वर और राग की परिभाषा एवं राग में प्रयुक्त किए जाने वाले शुद्ध तथा विकृत 12 स्वरों की स्थापना।
- गीत के अंग (स्थाई, अंतरा, मुखड़ा, टुकड़ा)।
- राग, समय, थाट, जाति, आरोह, अवरोह, स्वरसम (स्वरसंलग्नता) संबंधित एवं निर्धारित रागों की पहचान की परिभाषा।
- पं. विष्णु नारायण भातखंडे एवं पं. विष्णु दिगंबर पलुस्कर की जीवनियाँ एवं संगीतशास्त्र में योगदान।
- पं. विष्णु दिगंबर पलुस्कर की शैली एवं स्वररचना की विशेषताएँ।
- ताल की परिभाषा, मात्रा, काल, खंड, ताल, समय, विभाग, घटक, गति, दुगुन, तिगुन (विलंबित लय)।
- प्रमुख तालें, जो रचना हेतु लिखित क्रम में हैं:
- तीन ताल, एक ताल, झप ताल, खेरवा ताल, दादरा ताल, रूपक ताल एवं मध्यलय में ताल का तालसूत्र स्वरलिपी में लिखना।
- ताल के मुख्य एवं उपांगों की परिभाषा।
- ताल की दृष्टि से संगीत रचनाओं का वर्गीकरण, एवं विभिन्न लय केकों का शास्त्रीय दृष्टिकोण एवं उनका तालगत तालियों में लेखन।
नियमित / स्वाध्यायी – 2024–25
प्रायोगिक :- प्रदर्शन एवं मौखिक
समय: 30 मिनट पूर्णांक: 100 उत्तीर्णांक: 33
पिछले वर्ष के पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति :
- पाठ्यक्रम के राग – आसावरी, अड़ाना बिलावल, दुर्गा (बिलावल थाट), यमुनादेव सारंग, देश, तिलक कामोद :
- पाठ्यक्रम के रागों में स्वरस्थापन, लक्षणगीत का गायन। (गायन के विद्यार्थियों हेतु)
- पाठ्यक्रम के रागों में विविधित ख्याल गायन। (वाद्य के विद्यार्थियों हेतु सरगम/गीत का अथवा तानों एवं तोड़े सहित प्रस्तुति)
- पाठ्यक्रम में दिए रागों में एक मध्यलय ख्याल, एक द्रुत ख्याल, रागमाला गीत का अलग-अलग प्रस्तुति एवं परिचय सहित गायन।
- पाठ्यक्रम की किसी एक ताल में द्रुत (दुगुन और चौगुन सहित) एक तिहाई तथा एक ताल पर तिहाई का प्रदर्शन।
- आचार्यगण द्वारा प्राचीन या देशभक्ति गीत का स्वरस्थ गायन / वादन। (गायन हेतु विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुति एवं वादन हेतु कोई धुन प्रस्तुत करना।)
- के निम्नलिखित तालों का हाथ से ताली देकर दुगुन सहित प्रदर्शन। तीनताल, एकताल, झपताल, सूलताल, रूपक एवं तिलवाड़ा.
संदर्भ ग्रंथ
| 1. | हिन्दुस्तानी क्रमिक पुस्तक माला भाग 1 से 3 | – | पं. विष्णु नारायण भातखंडे |
| 2. | संगीत प्रवीण दर्शिका | – | श्री एल. एन. गुणे |
| 3. | राग परिचय भाग 1 से 2 | – | श्री हरिशरण श्रीवास्तव |
| 4. | संगीत विशालाद | – | श्री लक्ष्मीनारायण गर्ग |
| 5. | प्रकाशक प्रश्नोत्तरी | – | श्री हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव |
| 6. | संगीत शास्त्र | – | श्री ऍम. वी. मराठे |
| 7. | अभिनव गीतांजलि भाग 1 से 5 | – | पं. श्री रामाश्रय झा |
नियमित / स्वाध्यायी – 2025–26
Madhyama Diploma In Performing Art (M.D.P.A.)
अंतिम वर्ष गायन / स्वरवाद
संगीत शास्त्र
समय: 3 घंटे पूर्णांक: 100 उत्तीर्णांक: 33
पिछले पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति :
- तानों के प्रकार, राग व तानों की परिभाषा तथा अंतर।
- पूर्वांग, उत्तरांग, संगीतरूपता एवं स्वरपट प्रवेश रागों की संक्षिप्त जानकारी।
- पं. भातखंडे स्वरलिपि तथा ताल पद्धति एवं पं. विष्णु दिगंबर पलुस्कर जी की स्वरलिपि पद्धति का तुलनात्मक अध्ययन।
- गायन एवं वादन हेतु आवश्यक (शुद्ध वाद्य) के गुण दोषों का परिचय।
- श्री हरिदत्त, रागों मानसीक और भावनात्मक प्रभाव आदि विषयों पर आधारित उनके योगदान का जीवन परिचय एवं योगदान का वर्णन।
- चर्चित एवं अल्प चर्चित रागों का परिचय – बिहाग, केदार, मल्हार, दुर्गा, भीमपलासी, पूरियाधनाश्री, देश एवं तोड़ी।
- गायन/वादन के निषिद्ध रागों में स्वर प्रयोग का भातखंडे स्वरलिपि में लेखन।
- तालों – तीनताल, एकताल, झपताल, दादरा, कहरवा, आदि तालों और उनके अंग के ठेक़ा का छंद, दुगुन एवं चौगुन लयों में ताललिपि में लेखन।
नियमित / स्वाध्यायी – 2025–26
प्रायोगिक :- प्रदर्शन एवं मौखिक
समय: 30 मिनट पूर्णांक: 100 उत्तीर्णांक: 33
पिछले वर्ष के पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति :
- पाठ्यक्रम के राग – बिहाग, केदार, हमीर, योगेश्वरी, भीमपलासी, जोनपुरी, भटियार एवं तोड़ी।
- (अ) पाठ्यक्रम के रागों में स्वरस्थापन लक्षणगीत का गायन। (गायन विद्यार्थियों हेतु)
- (ब) पाठ्यक्रम के किसी चार रागों में विविधत रचना (बंदिश / सरगमलिपि) का आलाप, तान/तोड़े सहित प्रदर्शन।
- (स) पाठ्यक्रम के प्रत्येक राग में मध्यलय रचना (ख्याल / रागमाला गीत) का आलाप एवं पक्तियाँ सहित प्रदर्शन।
- (द) पाठ्यक्रम के किसी एक राग में ध्रुपद (दुगुन और चौगुन सहित) एक रचना, दो रागों तथा एक अन्य आधुनिक अन्य वाद्य पर तीनताल से एक ताल में एक बंदिश तथा एक रचना का प्रदर्शन।
- आचार्यगण द्वारा किसी सुप्रसिद्ध संगीत की रचना का स्वरस्थ गायन / वादन।
- पाठ्यक्रम के निम्नलिखित तालों में एक से दो तालों के ठेके, दुगुन एवं तिहाई प्रदर्शन: तीनताल, एकताल, झपताल, दादरा, कहरवा, रूपक, धमार, आडाजोड़ ताल और झाप।
संदर्भ ग्रंथ
| 1. | हिन्दुस्तानी क्रमिक पुस्तक माला भाग 1 से 3 | – | पं. विष्णु नारायण भातखंडे |
| 2. | संगीत प्रवीण दर्शिका | – | श्री एल. एन. गुणे |
| 3. | राग परिचय भाग 1 से 2 | – | श्री हरिशरण श्रीवास्तव |
| 4. | संगीत विशालाद | – | श्री लक्ष्मीनारायण गर्ग |
| 5. | प्रमाणक प्रस्नोत्तरी | – | श्री हरिशरण श्रीवास्तव |
| 6. | संगीत शास्त्र | – | श्री पं. वी. मराठे |
| 7. | अभिनव गीतांजलि भाग 1 से 5 | – | पं. श्री रामाश्रय झा |
अस्वीकरण: इस वेबपेज पर दिया गया पाठ्यक्रम से संबंधित विवरण केवल सामान्य जानकारी हेतु है। इसमें दी गई जानकारी में त्रुटियाँ हो सकती हैं या यह अद्यतन नहीं हो सकती है। कृपया अधिकृत जानकारी के लिए विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध PDF दस्तावेज़ को अवश्य देखें।